Amazon से Scamazon तक का मेरा सफर…अब दोबारा कभी नहीं करूंगा

Spread the love

मैं पिछले 6 सालों से ऑनलाइन शॉपिंग कर रहा हूं. ये वो समय था जब ऑनलाइन शॉपिंग बनारस जैसे शहर के लिए नया जैसा था या यूं कहे कि मेरे लिए नया था. मुझे याद है जब मैंने पहली बार Myntra से एक ट्राउजर और तीन टी-शर्ट ऑर्डर किए थे. उस समय ‘कैश ऑन डिलीवरी’ (COD) का ऑप्शन ज्यादा दिया जाता था और फिर मैं तो पहली बार कुछ ऑर्डर कर रहा था, इसलिए मुझे COD और फ्री डिलीवरी दोनों का ऑप्शन मिला. मेरा ऑर्डर डिलीवर होने में करीब एक हफ्ते लगने थे. सो मैंने इंतजार किया. हालांकि, एक हफ्ते पूरे होने से पहले ही मेरा ऑर्डर मुझे मिल गया. मैंने डिब्बा खोलकर देखा. सब कुछ ठीक था सिवाय पैंट के. पैंट का कलर थोड़ा-सा अलग था, लेकिन ठीक था.

(प्रतीकात्मक तस्वीर)

सामान ऑर्डर करने से पहले मुझे दो चीजों का डर था. पहला, कहीं उसका साइज बड़ा या छोटा ना हो जाए और दूसरा उसकी क्वालिटी. लेकिन, इन दोनों में से ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. साइज मेरे ही नाप की थी और क्वालिटी भी काफी अच्छी निकली. मेरा ऑनलाइन शॉपिंग का पहला एक्सपीरियंस काफी अच्छा रहा, इसीलिए धीरे-धीरे मैं इसका आदी हो गया. इसके बाद मैं Flipkart, Snapdeal, Jabong, E-Bay हर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से शॉपिंग करने लगा. उस वक्त Amazon भारत में कुछ खास फेमस नहीं था. ई-कॉमर्स पर लगभग 80 फीसदी कब्जा Flipkart का था और Myntra को भी उसने खरीद लिया था.

मैं Flipkart से ज्यादा शॉपिंग करता था क्योंकि इसकी डिलिवरी सबसे तेज होती थी और अगर सामान वापस भी करना हो तो भी ये सबसे तेज था. हालांकि, ऑनलाइन कपड़ों की क्वालिटी को लेकर मैं Flipkart पर भरोसा नहीं करता था. मैंने एक बार Flipkart से पैंट मंगाया था. उस पैंट की न तो साइज सही थी और न ही क्वालिटि. इसीलिए, कपड़ों के लिए मैं Myntra को ही पहली वरीयता देता था या फिर Jabong को. मैं किताब, कोई इलेक्ट्रानिक सामान या फिर किसी एक्सेसरीज के लिए भी ऑनलाइन शॉपिंग ही करने लगा.

(प्रतीकात्मक तस्वीर)

Flipkart ई-कॉमर्स का सबसे बड़ा नाम बन चुका था. इसके सामने Snapdeal या Amazon कहीं नहीं टिकता था. फिर, Flipkart ने एक बहुत बड़ी गलती कर दी और इसी गलती की वजह से आगे चलकर Flipkart को शायद अपने आप को वॉलमार्ट को बेचना पड़ा. Flipkart की उस गलती ने ना सिर्फ उसके मार्केट पर असर डाला बल्कि उसने Amazon को भारत में फैलने के लिए एक सुनहरा मौका दे दिया. ये साल 2015 की बात है जब Flipkart ने अपनी वेबसाइट बंद कर दी और सिर्फ मोबाइल ऐप पर शॉपिंग का ऑप्शन देने लगा. चूंकि, Myntra को भी Flipkart ने खरीद लिया था, इसलिए उसकी भी वेबसाइट बंद कर दी गई.

मैं अपनी बात करूं तो मैं ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट से ही करता था. इसकी एक सबसे बड़ी वजह ये थी कि मेरे पास उस वक्त एंड्रायड फोन नहीं था. Flipkart की वेबसाइट अब कम्प्यूटर पर भी नहीं खुलती थी, इस वजह से मुझे अपना ऑप्शन बदलना पड़ा. तब मैं Snapdeal ज्यादा यूज करने लगा. ये वही वक्त था जब Snapdeal ने आमिर खान को अपना ब्रैंड अंबैसडर बना लिया और अपना पूरा कलेवर बदल लिया. इसी वक्त Amazon ने भी #AurDikhao और #ApniDukaan जैसे ऐड कैंपेन शुरू कर लोगों से इमोशनल टच बनाने की कोशिश की.

(प्रतीकात्मक तस्वीर)

Flipkart का वेबसाइट बंद करना उसके लिए भारी पड़ गया और उसे काफी नुकसान हुआ. Snapdeal के उस वक्त के सीईओ ने भी इस कदम को बेवकूफी भरा बताया था. हालांकि, Snapdeal को Flipkart के नुकसान से ज्यादा कुछ फायदा नहीं हुआ, क्योंकि एक यूजर के लिए प्रॉडक्ट की क्वालिटी उसकी कीमत से भी सबसे ज्यादा मायने रखती है और Snapdeal यूजर का ये भरोसा जीतने में नाकाम रहा. लेकिन, इस दौरान Amazon ने भारत में अपने पांव पूरी तरह फैला लिए. Amazon की सबसे खास बात ये थी कि Flipkart, Snapdeal के मुकाबले सस्ता था और यहां क्वालिटी भी अच्छी मिलती थी. कुछ समय बाद Flipkart को भी उसकी गलती समझ आ गई और उसने अपनी वेबसाइट फिर से शुरू कर दी, लेकिन तब तक काफी देर हो गई और ई-कॉमर्स का नाम अब Amazon में बदल गया.

आज की तारीख में बात करें तो अब Amazon ही है जिस पर लोग ज्यादा भरोसा करते हैं और यहीं से ऑनलाइन शॉपिंग करना पसंद करते हैं. मैं भी Amazon का काफी पुराना कस्टमर रहा हूं लेकिन अब मैं इसे कभी इस्तेमाल नहीं करने वाला. आज के समय में ऑनलाइन शॉपिंग को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता लेकिन फिर भी मैं इससे बचने की कोशिश करूंगा और कम-से-कम मैं अब Amazon तो कभी नहीं इस्तेमाल करने वाला. मेरा ऐसा करने के पीछे Amazon की वाहियात सर्विस है. और इस घटिया सर्विस का भुक्तभोगी मुझे एक महीने में दो-दो बार बनना पड़ा है. एक बार गलती हो तो समझा जा सकता है लेकिन एक ही महीने में दो बार लगातार ऐसा होना कहीं-न-कहीं Amazon की अक्खड़ता दिखाता है. मैं वो दोनों किस्से बताता हूं, जिसकी वजह से मैं अब Amazon इस्तेमाल नहीं करने वाला.

(प्रतीकात्मक तस्वीर)

पहला वाकया फरवरी 2019 का है. मैंने Amazon से एक फॉर्मल स्लिपर ऑर्डर किया. उसकी कीमत 370 रुपये थी और डिलीवरी चार्ज 40 रुपये. चूंकि, ऑर्डर करते समय कैश ऑन डिलिवरी का ऑप्शन नहीं था तो मैंने ऑनलाइन पेमेंट कर दिया. मुझे Amazon पर भरोसा था कि ऑर्डर तो डिलिवर हो ही जाएगा. मैंने 10 फरवरी को ऑर्डर दिया था और उसके दो दिन बाद यानी 12 फरवरी को उसकी डिलिवरी होनी थी. आमतौर पर जब कोई ऑनलाइन डिलीवरी होने वाली होती है तो डिलीवरी वाले दिन मोबाइल पर एक मैसेज आ जाता है कि आपका ऑर्डर आज आपको मिल जाएगा. मैसेज में कुरियर बॉय का नंबर भी लिखा होता है. लेकिन, 12 तारीख को ऐसा कोई मैसेज मुझे नहीं आया. मैंने सोचा कि शायद डायरेक्ट फोन ही आएगा. लेकिन उस दिन कोई फोन भी नहीं आया. अचानक शाम को मेरे रजिस्टर्ड ईमेल आईडी पर एक मेल आता है और उसमें लिखा होता है कि मेरा ऑर्डर डिलीवर कर दिया गया है. मै थोड़ा-सा परेशान हो जाता हूं कि मुझे तो ऑर्डर मिला ही नहीं तो फिर ये डिलीवरी का मेल कैसे आ गया?

मैंने कस्टमर केयर को फोन लगाया. कस्टमर केयर के एक एग्जीक्यूटिव ने मुझसे कहा, ”कभी-कभी मेल पहले आ जाता है और ऑर्डर कुछ देर बाद डिलीवर होता है. आप परेशान मत होइए, आपको रात 9 बजे तक ऑर्डर डिलीवर कर दिया जाएगा.”

मैंने सोचा, ठीक है 9 बजे तक इंतजार कर लेते हैं. लेकिन 9 बजे तक भी मेरा ऑर्डर डिलीवर नहीं किया गया. मैंने फिर कस्टमर केयर को फोन लगाया तो उसने कहा, ”सर डिलीवरी एजेंसी से गलती हुई है…आप निश्चिंत रहे हम आपकी पूरी मदद करेंगे. आपको अगले 5 से 7 बिजनेस डेज़ यानी 20 तारीख तक ऑर्डर डिलीवर कर दिया जाएगा.

मैंने कहा, ”आप तो 12 फरवरी को ऑर्डर डिलीवर करने वाले थे तो फिर मुझे इतना लंबा इंतजार क्यों करवा रहे हैं? अगर मेरा ऑर्डर मेरे शहर में आ चुका है तो उसे कल तक डिलीवर करवाइए.”

एग्जीक्यूटिव ने बताया, ”सर, हमें चेक करना पड़ेगा कि आपका ऑर्डर अभी कहां है और इसमें 5 से 7 दिन लगेंगे.”

फिर मैंने कहा, ”देखिए, आपको पता होगा कि मेरा ऑर्डर किस डिलीवरी बॉय के पास था, आप मुझे उसका नंबर दीजिए या फिर आप खुद ही बात करिए कि मेरा ऑर्डर डिलीवर क्यों नहीं हुआ और अगर उसने डिलीवर किया है तो किसे किया है?”

एग्जीक्यूटिव ने कहा, ”सर, हमारे पास डिलीवरी बॉय का नंबर नहीं है. इसलिए हमें सबकुछ चेक करना होगा और उसके बाद उसकी रिपोर्ट भेजनी होगी. इसमें 5 से 7 दिन का वक्त लगेगा.”

मैंने कहा, ”चलिए अब मैं यहां से तो आपका कुछ कर नहीं सकता, 20 तारीख तक इंतजार ही करता हूं.”

(प्रतीकात्मक तस्वीर)

मैंने सोचा चलो 20 तारीख तक इंतजार करके देखता हूं. Amazon ने बोला है तो ऑर्डर डिलीवर हो ही जाएगा. 20 तारीख भी बीत गया लेकिन मेरा ऑर्डर डिलीवर नहीं हुआ. मैंने अगले दिन फिर फोन लगाया और कहा कि आपने कहा था कि मेरा ऑर्डर 20 फरवरी तक डिलीवर हो जाएगा लेकिन वो तो हुआ नहीं.

एग्जीक्यूटिव ने मुझे बताया, ”सर, आपका ऑर्डर कैंसल कर दिया गया है, अब आपको आपका रिफंड दिया जाएगा.”

(मेरा दिमाग खराब हो गया कि 10 दिन इंतजार कराने के बाद बोल रहा है कि आपका ऑर्डर कैंसल हो गया.)

मैंने उससे कहा, ”जब आपको ऑर्डर कैंसल ही करना था तो वो पहले ही कर देते और मेरा रिफंड वापस कर देते, मैं फिर से ऑर्डर कर देता.”

उसने कहा, ”सर, सब कुछ चेक करने में टाइम लगा इसलिए आपको इंतजार कराना पड़ा.”

फिर मैंने कहा, ”मेरा रिफंड मेरे अकाउंट में कब तक आएगा?”

एग्जीक्यूटिव ने कहा, ”सर, दो दिनों में यानी 22 फरवरी तक आपका रिफंड भेज दिया जाएगा. हमने यहां से रिफंड इनीशिएट कर दिया है.”

(मैं गाली नहीं देता इसलिए मैंने उससे कहा कि ठीक है. जब 10 दिनों तक इंतजार किया है तो 2 दिन और सही.)

22 तारीख के बाद भी मेरा रिफंड मेरे अकाउंट में नहीं आया. मैंने फिर एग्जीक्यूटिव से बात की. उसने कहा, ”सर, हमारी तरफ से रिफंड भेजा जा चुका है और आपके अकाउंट में 26 फरवरी तक पहुंच जाएगा.”

(मुझे लगा कि किसी दिन कोई Amazon वाला मेरे हाथ लग गया तो उसको तो मैं रिफंड देता.)

खैर, 16 दिनों बाद आखिरकार मेरा पैसा मुझे लौटाया गया.

इस वाकये के बाद मुझे लगा कि मेरे साथ ऐसा पहली बार हुआ है, इसलिए ज्यादा परेशान होने वाली बात नहीं है. लेकिन, दूसरी तरफ मैं ये भी सोच रहा था कि अगर किसी के पास लिमिटेड पैसे हो और उसे किसी चीज की जरूरत हो तो वो मेरे जैसा भुक्तभोगी कभी न बने. वरना उसको सामान भी नहीं मिलेगा और उसके पैसे भी फंस जाएंगे.

दूसरी वाकया 18 मार्च का है. मैंने किसी तरह ये मान लिया था कि Amazon मेरे साथ दोबारा ऐसा नहीं करेगा. बस इसी उम्मीद पर मैंने Amazon को अपनी ओर से माफ कर दिया.

मैं बहुत दिनों से एक DSLR कैमरा लेने की सोच रहा था. मेरा मूड बन गया था कि होली से पहले एक कैमरा ले लूंगा. होली का ऑफर चल रहा था तो मैंने 26000 रुपये का एक निकान का कैमरा ऑर्डर कर दिया. मुझे पहले लगा कि 26000 रुपये के ऑर्डर में तो Amazon कैश ऑन डिलीवरी का ऑप्शन देगा लेकिन ऐसा नहीं था. चूंकि, मुझे वो कैमरा चाहिए था इसलिए मैंने ऑनलाइन पेमेंट कर दिया. पेमेंट हो गया, अकाउंट से पैसे कट गए, ऑर्डर प्लेस हो गया, कन्फर्मेशन ईमेल आ गया और मोबाईल पर मैसेज भी आ गया. मेरी डिलीवरी 21 से 25 मार्च के बीच होनी थी. सब कुछ अब तक ठीक था.

My Order

लेकिन, Amazon वाले पता नहीं मुझसे किस जन्म का बदला ले रहे थे. ऑर्डर करने के कुछ देर बाद ही मुझे एक ईमेल आया कि आपका पेमेंट फेल हो गया, इसलिए आपका रिफंड इनीसिएट कर दिया गया है और आपके अकाउंट में ये 25 मार्च तक आ जाएगा. मेल देखने के बाद मैंने अकाउंट चेक किया. मुझे लगा कि पेमेंट फेल हुआ है तो शायद अकाउंट से पैसे वापस आ गए हों. लेकिन, ऐसा नहीं था. मेरे अकाउंट से 26000 रुपये कट चुके थे और शायद मेरा भी. अब मुझे गुस्सा आ रहा था लेकिन मैं कुछ नहीं कर सकता था, सिवाय 25 तारीख के इंतजार के. मेरे पास अब उतने पैसे भी नहीं थे कि मैं दूसरा कैमरा ऑर्डर कर सकूं.

मैंने फिर से कस्टमर केयर से बात की कि मेरे ऑर्डर के साथ क्या हुआ? जिस एग्जीक्यूटिव से मैंने बात की उसने शुरू के पांच मिनट तो मुझसे कहा कि आपका ऑर्डर 21 से 25 तारीख के बीच डिलीवर किया जाएगा. मैंने कहा- ‘ठीक है’. लेकिन, बाद में उसने मुझसे कहा कि मैं माफी चाहता हूं लेकिन पेमेंट फेल होने की वजह से आपका ऑर्डर कैंसल हो गया है, इसलिए आपको रिफंड दिया जाएगा जो कि 18 मार्च को ही इनीसिएट कर दिया गया है और आपके अकाउंट में 25 मार्च तक आ जाएगा. मैंने फिर कहा- ‘ठीक है’. मैं बेसब्री से 25 तारीख का इंतजार करने लगा क्योंकि इस बार 410 रुपये नहीं बल्कि 26000 रुपये की बात थी.

फिर अचानक एक दिन 21 मार्च को Amazon कुरियर की तरफ से मुझे एक फोन आता है. एक एग्जीक्यूटिव मुझसे कहता है, ”सर आपका ऑर्डर … लोइया रोड नोएडा सेक्टर 63 आ चुका है लेकिन होल्ड पर रखा हुआ है. आप Amazon हेड ऑफिस फोन करके बात कर लीजिए ताकि वो ऑर्डर डिलीवर करने का मुझे मेल फॉरवर्ड कर दें.”

मैं सोचने लगा कि मेरा ऑर्डर तो कैंसल हो गया था और मेरा रिफंड भी इनीसिएट हो चुका है तो फिर उन्होंने ऑर्डर कैसे भेज दिया. खैर, मैंने Amazon इंडिया के हेड ऑफिस में बात की. वहां के एग्जीक्यूटिव ने मुझसे कहा, ”सर आपका ऑर्डर नोएडा सेक्टर 63 पर होल्ड पर रखा हुआ है…” मैंने कहा, ”तो उसके रिलीज करिए आप.”

फिर उसने कहा, ”जी सर, हम यहां से इसे रिलीज कर दे रहे हैं लेकिन आपको दोबारा पेमेंट करना होगा.”

(अब मेरे सब्र इम्तिहान लिया दा रहा था लेकिन मैंने कंट्रोल कर लिया.)

उससे मैंने कहा, ”लेकिन पेमेंट तो मैं कर चुका हूं.”
एग्जीक्यूटिव ने कहा, “सर आपका पेमेंट फेल हो गया था इसलिए आपको दोबारा पेमेंट करना होगा. रिफंड इनिसिएट किया जा चुका है, आपका पुराना पेमेंट आपके अकाउंट में आ जाएगा.”

मैंने कहा, ”लेकिन अभी तक तो मेरे अकाउंट में पैसे आए नहीं. अगर आए होते तो मैं तुरंत पेमेंट कर देता.”

उसने कहा, ”सर, Amazon की तरफ से आपका रिफंड भेजा जा चुका है. अगर आपके अकाउंट में पैसे नहीं आए तो ये आपके बैंक की जिम्मेदारी है. हम कुछ नहीं कर सकते.”

मैंने कहा, ”मुझे रिफंड के लिए 25 तारीख तक का टाइम दिया गया है. मैं इंतजार कर रहा हूं. आप मेरा ऑर्डर कैंसल कर दीजिए.”

एग्जीक्यूटिव ने कहा, ”ठीक है सर. मैं आपका ऑर्डर कैंसल कर देता हूं.”

ऑर्डर कैंसल करने के बाद अचानक 23 तारीख को फिर मुझे अमेजन कुरियर से फोन आता है कि सर आपका ऑर्डर होल्ड पर है. अगर आज आपने रिसीव नहीं किया तो ऑर्डर रिटर्न कर दिया जाएगा.

मैंने कहा कि लेकिन मैंने तो ऑर्डर कैंसल करवा दिया था, फिर आपके पास ऑर्डर कैसे है?

एग्जीक्यूटिव ने कहा, ”नहीं सर, अभी आपका ऑर्डर कैंसल नहीं किया गया है. आप एक बार हेड ऑफिस बात कर लीजिए.

मैंने फिर फोन लगाया और सारी बात बताई. एग्जीक्यूटिव ने कहा, ”जी सर. आपका ऑर्डर कैंसल नहीं हुआ है और आज ऑर्डर रिसीव करने की आखिरी तारीख है. आपको दोबारा पेमेंट करके ऑर्डर लेना होगा.”

मैंने कहा- ठीक है मैं दोबारा पेमेंट कर देता हूं लेकिन अभी मेरे पास क्रेडिट कार्ड में पैसे है तो मैं उसी से पेमेंट करूंगा.

एग्जीक्यूटिव ने कहा, ”नहीं सर. आपको ऑनलाइन ही पेमेंट करना होगा.”

मैंने कहा कि मैं ऑनलाइन पेमेंट नहीं कर सकता. अगर आप क्रेडिट कार्ड से पैसे लेंगे तो ठीक है नहीं तो ऑर्डर कैंसल कर दीजिए.

फिर उसने कहा कि मुझे थोड़ा समय दीजिए मैं आपको फोन करके बताता हूं.

कुछ देर बाद उसका वापस से फोन आया. उसने कहा, ”सर, आप MobiKwik से पेमेंट कर सकते हैं क्योंकि वहां क्रेडिट कार्ड से पैसे ट्रांसफर होते हैं.”

मैंने उससे कहा, ”अगर फिर से पेमेंट फेल हो जाएगा तो मेरे तो 52000 रुपये फंस जाएंगे.”

उसने कहा, ”नहीं सर. इस बार पेमेंट फेल हो ही नहीं सकता क्योंकि Amazon और MobiKwik पार्टनर हैं. इसलिए पेमेंट में कोई दिक्कत नहीं आएगी.”

मैं दोबारा रिस्क नहीं लेना चाहता था, इसीलिए मैंने मना कर दिया और अपना ऑर्डर फिर से कैंसल करने को कह दिया. दो दिन बाद यानी 25 मार्च को मेरे पैसे मेरे अकाउंट में आ गए. तब मुझे कुछ राहत महसूस हुई.

(प्रतीकात्मक तस्वीर)

इन दो घटनाओं की वजह से ही मैं Amazon इस्तेमाल नहीं करने वाला हूं. ऐसा नहीं है कि मुझे Amazon को लेकर बहुत गुस्सा भर गया है, बल्कि मैं गुस्सा हूं क्योंकि वो अपनी सर्विस सुधार नहीं रहा. पहले केस में मुझे मेरे ही पैसे वापस पाने के लिए 16 दिनों का इंतजार करना पड़ा और दूसरे केस में एक हफ्ते. Amazon चाहता तो आसानी से इसका हल निकाल सकता है- कैश ऑन डिलीवरी का ऑप्शन देकर. लेकिन, वो ऐसा नहीं करता. या फिर उसे Mobikwik पर इतना ही भरोसा है तो वो उससे ही ट्रांजैक्शन करवाए, जिससे कि पेमेंट फेल होने की दशा में बैंक पर जिम्मेदारी डालने के बजाया वो सीधे MobiKwik अकाउंट में ही रिफंड भेज दे.

मेरा तो मानना ये भी है कि अगर Amazon जैसा कोई भी ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म अपनी सर्विस कस्टमर को सही से नहीं दे पाता है तो उसे उसका फाइन देना चाहिए. ऐसा करने से ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म ठीक ढंग से अपनी सर्विस भी देंगे और कस्टमर का भी नुकसान कम होगा.

ये ब्लॉग लिखने का उद्देश्य सिर्फ ये बताना था कि मेरे जैसा केस किसी के साथ भी हो सकता है. इसलिए ऑनलाइन पेमेंट करने से पहले एक बार जरूर सोचें.

Leave a Reply

Your email address will not be published.