वायु सेना में शामिल हुआ Boeing CH-47 Chinook हेलिकॉप्टर, लादेन को मारने में हुआ था इस्तेमाल

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नई दिल्ली: अमेरिकी हेलीकॉप्टर Boeing CH-47 Chinook आज भारतीय‌ वायु सेना के जंगी बेड़े में शामिल हो गए. अमेरिकी कंपनी बोइंग द्वारा निर्मित इन हेवीलिफ्ट हेलीकॉप्टर्स से वायुसेना की ताकत में बड़ा इजाफा होने की उम्मीद है. चंडीगढ़ एयर फोर्य स्टेशन पर आज बोइंग कंपनी ने चार (04) चिनूक हेलीकॉप्टर वायु सेना प्रमुख और एयर चीफ मार्शल बी एस धनोआ को सौंपें. खास बात ये है कि अमेरिकी नेवी सील कमांडोज ने चिनूक हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल ओसामा बिन लादेन को खत्म करने वाले नेप्चूयन स्पीयर ऑपरेशन में किया था.

Boeing CH-47 Chinook

चंडीगढ़ में होगी तिनूक की पहली स्कॉवड्रन
भारत ने साल 2015 में 15 चिनूक हेलीकॉप्टर खरीदने का सौदा अमेरिका से किया था. उसकी पहली खेप में ये चार हेलीकॉप्टर भारत पहुंच गए हैं. बाकी 11 के भी अगले एक साल में भारत पहुंचने की उम्मीद है. चिनूक (सीएच-47 एफआई) की पहली स्कॉवड्रन चंडीगढ़ में होगी.‌ ‘द फीदर वेट्स’ के नाम से मशहूर इस स्कॉवड्रन में पहले से ही तीन (03) हेवीलिफ्ट हेलीकॉप्टर मी-26 (Mi-26) मौजूद हैं, जो भारत ने 80 के दशक में रूस‌ से खरीदे थे. ये दुनिया की पहली ऐसी स्कॉवड्रन होगी, जहां रूसी और अमेरिकी हेलीकॉप्टर एक साथ होंगे.

कैसा दिखता है चिनूक हेलिकॉप्टर?
चिनूक हेलीकॉप्टर की दूसरी स्कॉवड्रन, असम के दिनजान में होगी, जो चीनी सीमा के बेहद करीब है.‌ चिनूक की खासयित ये है कि इसके ऊपर दो टेल-रोटर यानि पंखुड़ी लगी है और पूरी तरह से डिजीटल कॉकपिट मैनेजमेंट सिस्टम पर आधारित है और इसके साथ-साथ इसमें नाईट विजन ग्लास और हेलमेट माउंटेड डिस्पले है. यानि, ये स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन्स करने के लिए पूरी तरह से कारगर साबित होते हैं.

Boeing CH-47 Chinook

चिनूक की खासियत
अमेरिका ने चिनूक का इस्तेमाल वियतनाम वॉर से लेकर सीरिया, ईराक और अफगानिस्तान में किया है. चिनूक उन उंची सीमाओं पर भी पहुंच सकता है, जहां तक सड़क के रास्ते जाना मुमकिन नहीं हैं. ये हेलिकॉप्टर करीब 20 हजार फीट तक उड़ान भर सकता है. इसके अलावा ये करीब 10 टन तक वजन उठा सकता है. यानि हल्की तोपों से लेकर सड़क बनाने वाले बाउजर और जेसीबी मशीन तक ये उठा सकता है.

चिनूक बहुउद्देशीय, वर्टिकल लिफ्ट प्लेटफॉर्म हेलीकॉप्टर है, जिसका इस्तेमाल सैनिकों, हथियारों, सैन्य उपकरण और ईंधन ढोने में किया जाता है. करीब 50-55 सैनिक एक साथ इसमें बैठ सकते हैं. प्राकृतिक आपदा के दौरान भी ये हेलीकॉप्टर काफी कारगर है. इसमें बीमार और घायल लोगों के लिए 24 स्ट्रेचर तक लगाए जा सकते हैं. राहत सामग्री पहुंचाने और बड़ी संख्या में लोगों को बचाने में भी इसका उपयोग किया जा सकता है.

लादेन को मारने में चिनूक का अहम योगदान
बता दें कि साल 2011 में अमेरिकी नेवी सील कमांडो ने इसका इस्तेमाल आतंकी ओसामा बिन लादेन के खात्मे के लिए ऑपरेशन ‘नेप्चूयन स्पीयर’ में पाकिस्तान के एबोटाबाद में किया था. हालांकि, नेवी सील 02 ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर्स में पहुंचे थे, लेकिन चिनूक हेलीकॉप्टर्स को अतिरिक्त एनफोर्समेंट के साथ स्टैंड-बाई पर रखा गया था. लेकिन ऑपरेशन के दौरान एक ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर क्रैश-लैंड हो गया. ऐसे में चिनूक से ही कमांडोज को एबोटाबाद से निकाला गया और लादेन की लाश को भी इसी से पाकिस्तान से निकाला गया था.

गेम-चेंजर साबित होगा चिनूक
चिनूक की इंडक्शन सेरमनी के दौरान भारतीय‌ वायुसेना की पहली चिनूक स्कॉवड्रन के कमांडिंग ऑफिसर ने भी कहा कि वे जानते हैं कि ऑपरेशन नेप्चूयन स्पीयर में चिनूक का इस्तेमाल हुआ था. समारोह में बोलते हुए वायुसेना प्रमुख बी एस धनोआ ने कहा कि क्योंकि चिनूक दिन-रात दोनों वक्त उड़ान भर सकता है, इसलिए मिलिट्री ऑपरेशन्स के लिए ये ‘गेम-चेंजर’ साबित होगा. उन्होनें कहा कि जिस तरह राफेल फाइटर फ्लीट में गेम चेंजर है, ठीक वैसे ही हेलीकॉप्टर्स में चिनूक है. चिनूक को करीब 20 देशों की सेनाएं इस्तेमाल करती है.

Boeing CH-47 Chinook

समारोह में सभी धर्मगुरूओं ने देश की सुरक्षा और वायुसेना की क्षमता की दुआएं मांगी और प्रार्थना की. इस दौरान मीडिया से बातचीत में बी एस धनोआ ने पाकिस्तानी वायु सेना प्रमुख पर चुटकी लेते हुए कहा कि वे तो कॉकपिट में पीछे बैठते हैं.‌ दरअसल, पाकिस्तान ने 23 मार्च को अपने नेशनल डे पर वायु सेनाध्यक्ष मुजाहिद अनवर खान की तस्वीरें और वीडियो जारी किए थे जिसमें वे एक फाइटर जेट में उड़ान भर रहे थे. इन वीडियो और तस्वीरों के जरिए पाकिस्तान ने दावा किया था कि वायुसेना प्रमुख ने फ्लाई-पॉस्ट को लीड किया था, लेकिन असल में वे मेन पायलट के पीछे बैठे हुए थे. लेकिन, पाकिस्तान ने मेन-पायलट को छिपाकर ऐसी तस्वीर जारी की जिसमें वायुसेनआ प्रमुख ही दिख रहे हैं.‌

देखें वीडियो:

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